अंडमान में संसदीय समिति की महत्वपूर्ण बैठक: राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक महत्व पर गहन चर्चा

हाल ही में भारत के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में एक उच्च-स्तरीय संसदीय सलाहकार समिति की बैठक का आयोजन किया गया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श का मंच प्रदान किया। यह आयोजन न केवल इन द्वीपों की सुरक्षा चुनौतियों को रेखांकित करता है, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की बढ़ती सामरिक उपस्थिति और क्षेत्रीय अखंडता सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।

अंडमान-निकोबार द्वीप समूह की असाधारण सामरिक महत्ता

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह भारत के लिए केवल प्राकृतिक सौंदर्य का प्रतीक नहीं, बल्कि उसकी सुरक्षा और विदेश नीति का एक अभिन्न अंग हैं। बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर के संगम पर स्थित ये द्वीप समूह महत्वपूर्ण शिपिंग लेन (समुद्री व्यापार मार्ग) के करीब हैं, जो एशिया को अफ्रीका और यूरोप से जोड़ते हैं। इनकी भौगोलिक स्थिति भारत को इस महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्र में निगरानी और नियंत्रण स्थापित करने की अद्वितीय क्षमता प्रदान करती है। चीनी नौसेना की बढ़ती गतिविधियों और इस क्षेत्र में अन्य शक्तियों के हितों को देखते हुए, अंडमान की सुरक्षा और सैन्य उपस्थिति का सुदृढीकरण भारत की समुद्री सुरक्षा रणनीति के लिए सर्वोपरि है। बैठक में इस क्षेत्र में होने वाले भू-राजनीतिक परिवर्तनों और उनके भारत पर पड़ने वाले प्रभावों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया।

राष्ट्रीय सुरक्षा के विभिन्न आयामों पर व्यापक विचार-विमर्श

संसदीय सलाहकार समिति की इस बैठक का केंद्रीय विषय राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा करना था। इसमें समुद्री सीमाओं की सुरक्षा, अवैध घुसपैठ को रोकना, तस्करी पर अंकुश लगाना और आपदा प्रबंधन जैसे विषय प्रमुख थे। भारत की लंबी तटरेखा और द्वीप क्षेत्रों की भेद्यता को देखते हुए, तटीय सुरक्षा तंत्र को मजबूत करना हमेशा से एक प्राथमिकता रही है।

समुद्री सीमा सुरक्षा में नई चुनौतियाँ और समाधान

बैठक में समुद्री सीमा सुरक्षा से जुड़ी नई चुनौतियों पर गंभीरता से मंथन किया गया। इसमें अत्याधुनिक निगरानी प्रणालियों, रडार नेटवर्क और तटीय गश्त को और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया। भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल की भूमिका को और सशक्त करने के उपायों पर भी चर्चा हुई, ताकि किसी भी बाहरी खतरे या अवैध गतिविधियों का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सके। इसके अतिरिक्त, द्वीपों की संवेदनशीलता को देखते हुए, स्थानीय प्रशासन और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया।

आंतरिक सुरक्षा और क्षेत्रीय विकास का संतुलन

राष्ट्रीय सुरक्षा का संबंध केवल बाहरी खतरों से नहीं होता, बल्कि इसमें आंतरिक सुरक्षा और क्षेत्रीय विकास भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बैठक में अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में बुनियादी ढांचे के विकास, संचार नेटवर्क को मजबूत करने और स्थानीय आबादी की जरूरतों को पूरा करने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। यह माना गया कि सुदृढ़ बुनियादी ढाँचा और स्थानीय समुदाय का सशक्तिकरण, सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने में सहायक होगा। पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और जनजातीय अधिकारों का सम्मान सुनिश्चित करने पर भी विचार किया गया, ताकि समग्र विकास के साथ सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

निष्कर्ष: एक सुरक्षित और सुदृढ़ भारत की दिशा में एक कदम

अंडमान में आयोजित इस संसदीय सलाहकार समिति की बैठक ने भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति को एक नई दिशा प्रदान की है। यह स्पष्ट करता है कि सरकार हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के हितों की रक्षा और अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। ऐसी बैठकें नीति निर्माताओं को जमीनी हकीकत से अवगत कराती हैं और भविष्य की नीतियों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की सामरिक महत्ता को ध्यान में रखते हुए, इन पर निरंतर ध्यान और आवश्यक संसाधनों का निवेश भारत को क्षेत्रीय शक्ति के रूप में और मजबूत करेगा, जिससे एक सुरक्षित और सुदृढ़ भारत के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: अंडमान में हुई संसदीय सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता किसने की?

उत्तर: इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता भारत के केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने की।

प्रश्न 2: बैठक का मुख्य एजेंडा क्या था?

उत्तर: बैठक का मुख्य एजेंडा राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श करना था, जिसमें अंडमान-निकोबार द्वीप समूह की सामरिक सुरक्षा और समुद्री सीमा सुरक्षा प्रमुख थे।

प्रश्न 3: अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का भारत की सुरक्षा के लिए क्या महत्व है?

उत्तर: अंडमान और निकोबार द्वीप समूह हिंद महासागर में भारत के लिए अत्यधिक सामरिक महत्व रखते हैं। ये द्वीप महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों के करीब स्थित हैं और भारत को इस क्षेत्र में निगरानी तथा नियंत्रण स्थापित करने में सक्षम बनाते हैं, जिससे समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित होती है।

प्रश्न 4: बैठक में किन प्रमुख सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा की गई?

उत्तर: बैठक में समुद्री घुसपैठ, तस्करी, तटीय निगरानी को मजबूत करने और आपदा प्रबंधन जैसी प्रमुख सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा की गई, साथ ही उनके समाधान के उपायों पर भी विचार-विमर्श हुआ।

प्रश्न 5: संसदीय सलाहकार समिति का उद्देश्य क्या होता है?

उत्तर: संसदीय सलाहकार समितियाँ सरकार और संसद सदस्यों के बीच संवाद के लिए एक मंच प्रदान करती हैं, जिससे विभिन्न मंत्रालयों से संबंधित नीतियों और कार्यक्रमों पर गहन चर्चा हो सके और संसद सदस्यों को नीति निर्माण प्रक्रिया में योगदान करने का अवसर मिले।

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